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मेरठ के कुख्या गैंगस्टर उधम सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने उधम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
उधम सिंह को पकड़ने के लिए यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली में पुलिस व एसटीएफ की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत लेने के आरोप में उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित है। मामला मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। डी-50 गैंग का सरगना उधम सिंह चार साल आठ महीने बाद 26 मार्च 2026 को उन्नाव जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। आरोप है कि फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए उसकी जमानत कराई गई। इस संबंध में 9 अप्रैल 2026 को सरूरपुर थाने में शिकायतकर्ता अनवर की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, शेखर नामक व्यक्ति ने बिना दलाली ऋण दिलाने का झांसा देकर आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लिए। बाद में पता चला कि उन्हीं दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल उधम सिंह की जमानत कराने में किया गया। ऋण भी स्वीकृत नहीं हुआ और शिकायतकर्ता को धमकाकर भगा दिया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने रिपोर्ट न्यायालय को भेजी, जिसके आधार पर उधम सिंह की जमानत रद्द कर दी गई और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। इसके बाद पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उधम सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से उसे फिलहाल अंतरिम राहत मिल गई है।