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मेरठ में बंदरों के हुड़दंग से परेशान शहरवासियों को राहत दिलाने के लिए वन विभाग इस वृक्षारोपण महोत्सव में एक अनोखा प्रयोग करने जा रहा है. इसके तहत शहर के विभिन्न स्थानों पर 'कपिवन' बसाए जाएंगे, जिनमें बड़े पैमाने पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि बंदरों को खाने-पीने की चीजें वहीं मिल सकें. मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट के अनुसार, इस पहल से बंदरों का शहर की तरफ आना कम होगा.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में अगर आप भी बंदरों के हुड़दंग और आतंक से परेशान हैं और वन विभाग व नगर निगम के चक्कर काटकर थक चुके हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है. अब बंदरों की इस समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने के लिए वन विभाग इस बार वृक्षारोपण महोत्सव में एक बेहद अनोखा प्रयोग करने जा रहा है. विभाग की योजना शहर में ‘कपिवन’ बसाने की है, जिससे लोगों को इस बड़ी मुसीबत से छुटकारा मिल सके. इस योजना को लेकर मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट ने खास जानकारी साझा की है.
मेरठ की डीएफओ वंदना फोगाट ने बताया कि शहर की तरफ बंदरों का आना लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे लोग काफी परेशान हैं और विभाग को आए दिन शिकायतें मिलती रहती हैं. इसी को देखते हुए इस साल वृक्षारोपण महोत्सव के दौरान कपिवन बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी. इन विशेष वनों में सबसे ज्यादा फलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि बंदरों को खाने-पीने की हर चीज वहीं मिल जाए और उन्हें भोजन की तलाश में शहर का रुख न करना पड़े. भविष्य में बंदर इन वनों में आसानी से रह सकें, इसके लिए विभाग लगातार इनकी मॉनिटरिंग भी करेगा. ये कपिवन बंदरों को उनके घर जैसा ही एहसास कराएगा.
हर कोई एक दूसरे पर फोड़ता था ठीकरा
दरअसल, मेरठ के लोग बंदरों से इस कदर परेशान हैं कि कई बार दुर्घटनाओं का शिकार भी हो चुके हैं. लोग नगर निगम से लेकर वन विभाग तक गुहार लगा चुके थे, लेकिन दोनों ही विभाग बंदरों की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते रहे हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा था. अब उम्मीद जताई जा रही है कि वन विभाग की इस नई कोशिश से शहरवासियों को बंदरों के डर से बड़ी राहत मिल पाएगी.
इसके साथ ही वन विभाग पर्यावरण को बढ़ावा देने और गंगा को सुरक्षित रखने के लिए नदी के किनारे ‘अविरल धारा वन’ और ‘सौर ऊर्जा वन’ समेत कई अन्य तरह के विशेष वन भी तैयार करने जा रहा है, जो प्रकृति को बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.