Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
Choose Location
गोंडा ,दहेज हत्या में आरोपित पति को 36 साल बाद कोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने के दंड में संशोधन करते हुए पांच महीने जेल में बिताई अवधि को सजा मानते हुए मुकदमा समाप्त करने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वादी मुकदमा ने 17 फरवरी 1990 को वजीरगंज थाने में एफआइआर दर्ज कराया। कहा कि उसकी बहन रमादेवी का विवाह पांच साल पूर्व ग्राम जुनाहट निवासी फौजदार के साथ हुआ था। आए दिन वह रामादेवी को परेशान करने लगा। दहेज में मोटरसाइकिल और अन्य सामान की मांग की। आरोप लगाया कि रामादेवी पर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने आरोपित फौजदार, रामावती उर्फ मीरा देवी और सूरज प्रसाद शुक्ला के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे के दौरान सूरज प्रसाद शुक्ला की मृत्यु हो गई। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने 25 अक्टूबर 2010 को आरोपितों को दहेज उत्पीड़न के अपराध में दो साल कठोर कारावास और पांच सौ रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। फौजदार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में अपील प्रस्तुत कर निचली अदालत का आदेश निरस्त करने की मांग की।
अधिवक्ता ने कहा कि अपीलकर्ता इस मामले में पांच महीने से अधिक की सजा काट चुका है। उसकी वर्तमान में आयु 65 वर्ष है और उसने अपनी गलती का एहसास कर लिया है और अपने आचरण के लिए पश्चाताप करता है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने अपील का निस्तारण किया और सजा को संशोधित करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता द्वारा पहले से भुगती गई अवधि यानी पांच महीने तक संशोधित किया जाता है। न्यायमूर्ति ने निर्णय में कहा कि उसे खुद को सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए और उसे उस समाज में अपना बेहतर योगदान देने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे वह संबंधित है।